दिन चौदह घंटे का था. वे किसने लिए?
बस स्टैंड पर कोई आपके जूते पर पैर रख देता है. उसमें चार सेकंड लगते हैं. पर उन चार सेकंडों ने आगे क्या-क्या खाया — वापस आई फ़ाइल, जिसका स्वाद ही नहीं आया वह खाना, धीरे से बंद किया दरवाज़ा — उसमें पूरा दिन जाता है. नौ कहानियाँ, हर एक कुछ मिनट की, और उनमें कहीं आपकी ग़लती नहीं निकाली गई.
नौ कहानियाँ